सोनी का नया PS5 Pro गेमिंग की दुनिया का सबसे महंगा मजाक है। अगर आप इसे खरीदने की सोच रहे हैं, तो आप सिर्फ अपने पैसे ही नहीं, बल्कि अपनी समझदारी भी बर्बाद कर रहे हैं।
यह अपग्रेड नहीं, एक बेतुका दिखावा है सोनी ने PS5
Pro लॉन्च करके यह साबित कर दिया है कि उन्हें गेमर्स की जेब काटने में कोई शर्म नहीं आती। बाजार में पहले से मौजूद PS5 क्या कम था जो अब यह 'प्रो' वर्जन लाकर ग्राहकों को बेवकूफ बनाया जा रहा है? सच तो यह है कि यह कंसोल उन लोगों के लिए है जिनके पास खर्च करने के लिए बहुत पैसा है लेकिन दिमाग का इस्तेमाल करने के लिए समय नहीं है। यह हार्डवेयर का कोई क्रांतिकारी कदम नहीं है, बल्कि एक ऐसा मामूली सुधार है जिसे आप अपनी नंगी आंखों से शायद ही देख पाएंगे। सोनी का पूरा मार्केटिंग कैंपेन सिर्फ एक ही बात पर टिका है: 'बेहतर ग्राफिक्स'। लेकिन क्या वाकई हमें इसकी जरूरत है? गेमिंग का मतलब अनुभव और कहानी होती है, न कि पिक्सेल की गिनती करना। जब मौजूदा कंसोल पहले से ही शानदार प्रदर्शन दे रहे हैं, तो इस नए डिब्बे को घर लाने का कोई तार्किक कारण नहीं बनता। यह सिर्फ कंज्यूमरिज्म का एक और घटिया उदाहरण है।
कीमत और औकात का फर्क इसकी कीमत सुनकर ही किसी भी आम इंसान को चक्कर आ जाएंगे। इतने पैसे में आप एक हाई-एंड पीसी बना सकते हैं जो इस कंसोल को कहीं पीछे छोड़ देगा। सोनी को लगता है कि उनके ब्रांड के नाम पर लोग कुछ भी खरीद लेंगे, और शायद वे सही भी हैं। लेकिन एक समझदार गेमर के तौर पर हमें इस लूट का हिस्सा बनने से इनकार कर देना चाहिए। इस 'प्रो' मशीन के साथ सोनी ने जो किया है, वह गेमिंग कम्युनिटी के लिए एक अपमान है। उन्होंने कोई नया गेम नहीं दिया, कोई नया अनुभव नहीं दिया, बस एक महंगा हार्डवेयर थमा दिया है। अगर आप इसे खरीद रहे हैं, तो आप सिर्फ यह बता रहे हैं कि कंपनियां आपको आसानी से लूट सकती हैं।
गेमर्स को क्या मिल रहा है? - मामूली रूप से बेहतर फ्रेम रेट्स जो गेमप्ले नहीं बदलेंगे। - एक भारी-भरकम कीमत जो आपके बजट को बिगाड़ देगी। - बिना डिस्क ड्राइव वाला डिजाइन, जो आपको सोनी की डिजिटल दुकान का गुलाम बना देता है। - पुरानी एक्सेसरीज के साथ जबरदस्ती का तालमेल बिठाने की कोशिश। क्या आपको वाकई लगता है कि ये चीजें आपके बैंक अकाउंट के खाली होने का कारण बननी चाहिए? यह सब सिर्फ मार्केटिंग का शोर है। गेमिंग कंपनियां अब गेम बनाने से ज्यादा हार्डवेयर बेचने पर ध्यान दे रही हैं क्योंकि वहां मुनाफा ज्यादा है और मेहनत कम।
क्या यह अंत की शुरुआत है? अगर हम इसी तरह हर दो साल में 'प्रो' वर्जन खरीदते रहेंगे, तो गेमिंग का भविष्य बहुत अंधकारमय है। सोनी ने एक ऐसा ट्रेंड शुरू किया है जो कंसोल गेमिंग को पीसी की तरह महंगा और जटिल बना रहा है। कंसोल का मतलब हमेशा से ही 'प्लग एंड प्ले' रहा है, लेकिन अब यह भी एक जटिल और महंगी प्रक्रिया बन चुकी है। हमें सोनी को यह संदेश देना होगा कि हम इस तरह की लूट बर्दाश्त नहीं करेंगे। गेमिंग को मनोरंजन रहना चाहिए, न कि अमीरों का खिलौना। अगर आप इसे खरीदने की सोच रहे हैं, तो एक बार रुकिए और सोचिए कि क्या आपको वाकई इसकी जरूरत है या आप सिर्फ एक ट्रेंड के पीछे भाग रहे हैं। सच तो यह है कि यह कंसोल सिर्फ सोनी के मुनाफे के लिए है, आपके गेमिंग अनुभव को बेहतर बनाने के लिए नहीं।